अदालत के फैसले से खुश है स्व. केसरी की पत्नी व पूर्णिया की विधायक किरण केसरी पर संतुष्ट नहीं है . वह उपरी अदालत जायेंगी रूपम पाठक को फांसी की सजा दिलवाने के लिए .वहीं रूपम पाठक की माँ कुमुद पाठक कह रही हैं कि मेरी बेटी को साजिश के तहत मोहरा बनाया गया है . उसका घर उजाड़ा गया और बच्चों को अनाथ कर दिया गया . फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करती समाज सेविका और वकील पद्म श्री सुधा वर्गीज कह रही हैं कि रूपम को पूरा इन्साफ नहीं मिला है . अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ भी 13 अप्रैल को विरोध दिवस मनायेगा . ये तो है केन्द्रीय भूमिका में नारी के कई रूप पर परदे के पीछे का विद्रूप व भयावह सच है ' लव ,सेक्स और धोखा ' .
रूपम पाठक ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया इसके पीछे एक लम्बी कहानी तो है ही पर आखिरी कड़ी में एक और नारी-पात्र का जुड़ना कहानी के अंत को ये रूप दे जायेगी इसका अंदाजा शायद कहानी के मुख्य पात्रों को भी नहीं था . दबी जुबान में ये खबर भी उभर कर आई थी कि स्व. विधायक व उसके करीबी कि बुरी नजर रूपम पाठक की बेटी पर पड़ने लगी थी .जो शायद एक माँ को मंजूर नहीं हुआ . खुद नर्क में जीने को मजबूर थी ही पर बेटी की तकदीर में उसी नर्क को नहीं देना चाहा .
अब राजनीतिक गलियारे से गुजरती महत्वाकांक्षा का हश्र सब देख रहे हैं . सब उसकी चुकाई कीमत का आकलन कर रहे हैं . इस तरह का स्कैंडल , मर्डर , हंगामा अपने पिछले इतिहास के बगल में जगह बना रही हैं . जहाँ वह दफ़न हो सके . इससे जुड़े सवालों का बवंडर यूँ ही घूम-घूम कर शांत हो ही जाएगा . वर्ज्य नारियों का स्वर फिर से दबा दी जायेगी .
रूपम पाठक ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया इसके पीछे एक लम्बी कहानी तो है ही पर आखिरी कड़ी में एक और नारी-पात्र का जुड़ना कहानी के अंत को ये रूप दे जायेगी इसका अंदाजा शायद कहानी के मुख्य पात्रों को भी नहीं था . दबी जुबान में ये खबर भी उभर कर आई थी कि स्व. विधायक व उसके करीबी कि बुरी नजर रूपम पाठक की बेटी पर पड़ने लगी थी .जो शायद एक माँ को मंजूर नहीं हुआ . खुद नर्क में जीने को मजबूर थी ही पर बेटी की तकदीर में उसी नर्क को नहीं देना चाहा .
अब राजनीतिक गलियारे से गुजरती महत्वाकांक्षा का हश्र सब देख रहे हैं . सब उसकी चुकाई कीमत का आकलन कर रहे हैं . इस तरह का स्कैंडल , मर्डर , हंगामा अपने पिछले इतिहास के बगल में जगह बना रही हैं . जहाँ वह दफ़न हो सके . इससे जुड़े सवालों का बवंडर यूँ ही घूम-घूम कर शांत हो ही जाएगा . वर्ज्य नारियों का स्वर फिर से दबा दी जायेगी .