Tuesday, January 18, 2011

दुहाई

तुम्हारा दावा
कब हवा हो जाती है
कब तुम
बन जाते हो चक्रवात
प्यार का चिंदी-चिंदी उड़ाकर
तुम कर ही नहीं सकते- प्यार
तुम्हारी न शांत होने वाली भूख
तुम्हे क्या-क्या बना देती है ...
तुम्हे जरुर पता होगा
गिरगिट का शरीर
लपलपाते जीभ
अगले ही पल रूप बदल
मगर सा कुशल शिकारी ....
तुम्हे जिलाए रखेगी
आने वाले
कई करोड़ वर्षों तक...
नहीं जरुरत है तुम्हे
ओढ़ने की
सियार का खाल..
बस तुम चुप ही रहो
नहीं दुहाई दो
प्यार की.....
शांत करते रहो
अपनी भूख....
बस ये मत कहो
मैं तुम्हे प्यार करता हूँ
सदियों -सदियों से 

25 comments:

  1. हकीकत लिख दी है ....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. यथार्थ का आइना हैं यह पंक्तियाँ......

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  3. मेरे ब्लॉग जज़्बात पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया......आपके ब्लॉग की पहली ही पोस्ट शानदार है......बहुत ही भावपूर्ण पंक्तियाँ लिखी हैं.....उम्मीद है आगे भी साथ बना रहेगा......आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ.....शुभकामनायें|

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  4. वाह अदभुत ब्लाग गज़ब पोस्ट
    बधाइयां

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  5. जितनी तारीफ़ की जाय कम है ।

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  6. नाम के अनुरूप ब्लॉग .... अति सुन्दर .बधाई

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  7. बस ये मत कहो
    मैं तुम्हे प्यार करता हूँ
    सदियों -सदियों से ....बड़े जुदा अंदाज में हालात बयां कर दिए अपने..बधाई. 'शब्द-शिखर' पर भी कभी पधारें.

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  8. सत्‍य के बेहद करीब।

    -------
    क्‍या आपको मालूम है कि हिन्‍दी के सर्वाधिक चर्चित ब्‍लॉग कौन से हैं?

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  9. यथार्थ की अभिव्यक्ति!!

    शानदार ब्लॉग!! स्वागत आपका!!

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  10. जीवन के एक वास्तविक रंग का वर्णन किया है आपने इस कविता में।
    अच्छी रचना।

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  11. बस तुम चुप ही रहो
    नहीं दुहाई दो
    प्यार की.....
    शांत करते रहो
    अपनी भूख....
    बस ये मत कहो
    मैं तुम्हे प्यार करता हूँ
    सदियों -सदियों से
    बहुत अच्छा लिखा है और सच है सदियों का.....यहां बार-बार आना पड़ेगा....अच्छा पढ़ने के लिए....

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  12. शाश्वत मानवीय रिश्ते के एक गहरे असंवाद की अभिव्यक्ति ..
    इतना तामस!
    हर वक्त रंजो मलाल क्या ....जो गुजर गया वो गुजर गया
    तू खिजा का फूल है मुस्कुरा ..जो गुजर गया वो गुजर गया ..
    उसे याद कर न दिल दुखा ..जो गुजर गया सो गुजर गया ...(...बशीर बद्र ) ...
    चीयर अप ! यंग लेडी !
    -पूरी गजल -

    Har Waqt Ranj-O-Malaal Kya, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya
    Use Yaad Karke Na Dil Dukha, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Na Gila Kiya, Na Khafa Huye, Yoon Hi Raaste Mein Khuda Huye
    Na Tu Bewafa Na Main Bewafa, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Voh Ghazal Ki Ek Keetab Tha, Voh Gullon Mein Ek Gulab Tha
    Zara Der Ka Koi Khwab Tha, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Mujhe Patjhadon Ki Kahaniyan Na Suna-Suna Ke Udas Kar
    Tu Khizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Ye Safar Bhi Kitna Taveel (Lamba) Hai Yahan Waqat Kitna Kaleel Hai
    Kahan Laut Kar Koi Aayega Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Voh Wafayein Thi Ke Jafayein Thi, N Ye Soch Kiski Khatayein Thi
    Voh Tera Hai Usko Gale Laga Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahi, Nahi Duniya Itni Buri Nahi
    N Malaal Kar Mere Saath Aa Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    - Bashir Badr

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  13. मनमोहक ब्लॉग पर सुंदर रचना पढने को मिली

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  14. यथार्थ को अभिव्यक्त करती एक सार्थक पोस्ट ...आपका शुक्रिया

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  15. Yatharth ko bade pyar se aapne parosa hai...:)
    abhar

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  16. .

    शांत करते रहो
    अपनी भूख....
    बस ये मत कहो
    मैं तुम्हे प्यार करता हूँ....

    सच कहा , बहलाया बच्चों कों जाता है , वयस्कों कों नहीं । जहाँ स्वार्थ है , वहां प्यार का दिखावा क्यूँ ?

    .

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  17. धारदार लेखनी .....विषय पर अच्छी पकड़ .........पर भाषा के परिमार्जन की आवश्यकता.
    परिष्कृत लेखन के लिए शुभकामनाएं !

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  18. sabhi kavitayen bahut hi sunder hai

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  19. nari ka chirran sateek kiya hai

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