Saturday, February 5, 2011

तल के तले

एक तल पर तुम
एक और तल पर मैं...
दोनों एक दूसरे के
तल के तले......
रिश्तों की अतल गहराइयां
 दोनों -डूबते उतराते
प्राण-वायु 
वासनाओं की
दमित इच्क्षाएं 
हमारे पैरों तले
न फूटने वाले
मजबूरियों के बुलबुले
न जीते न मरते हम 
दबे रहते हमेशा
एक-दूसरे के भार तले
या दबाये रहते ?
जिसके हाथ लग जाता
कलछी-कडाही
उसी के तेल में तल
हड्डियाँ सहित
खाने को आतुर..
स्वादिष्ट ,जायकेदार
लाजवाब व्यंजन बनाकर 
मेरी जान!
ये जीवन का समंदर है
न ही हम
ठहर सकते
निचली तल पर
न ही उपरी तल पर..
हमें बनाते रहना है
एक-दूसरे को तल
या खींचते रहना है
क्या फर्क पड़ता है ?

21 comments:

  1. जीवन में हम किसी के साथ अपनी इच्छाओं के कारण बंधते हैं ...आपने बहुत सुंदर तरीके से अपने मन के भाव को अभिव्यक्त किया है ....आपका आभार

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  2. बहुत सुन्दर......सही बात कई बार रिश्ते पाँव की बेड़िया भी बन जाते है जा उनमे से प्रेम ख़तम होने लगता है.......बहुत खूब|

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  3. मन के भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति

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  4. कल है तेदीिवेय्र डे मुबारक हो आपको एक दिन पहले

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    Happy Teddy Vear Day

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  5. jeevan ki kashamkash... ek tal ke neeche, humne kitne hi tal banaa liye aur kitne hi kal barvaad kar diye.

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  6. रिश्तों के बीच ऊपर -नीचे होती सच्चाई का बखूबी चित्रण ।

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  7. प्रिय … … …
    नमस्कार !
    ( उद्देश्य ग़लत नहीं है तो नाम छुपाना क्या ज़रूरी है … ?! )
    आपकी मेल आईडी होती तो मैं मेल माध्यम से बात कहता ।
    आप चाहें तो पढ़ने के बाद इस कमेंट को डिलीट कर दें ।

    आपकी कविता में आक्रोश और विद्रोह के तेवर मुखरित हैं ।
    पिछली कविता दुहाई में भी ऐसे ही स्वर हैं ।
    ग़ौर किया तो वर्ज्य नारी स्वर समाज की विसंगतियों से संत्रस्त प्रतीत हुआ ।

    पुरुष हो अथवा नारी , कवि मन व्यथित हो तो मैं आहत हो जाता हूं …
    ईश्वर आपके जीवन में बसंत का उल्लास लाए… … …

    बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  8. रिश्तों की कलई खोलती रचना ...बहुत सुन्दर

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  9. अतर्संबंधो में निहित विरोधाभासों को उदघाटित करती संवेदनशील और मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  10. ek kamyaab rachna. bahut sundar
    badhai aapko.......

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  11. वाह भी SMSHINDI तुम्हारी जय हो

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  12. रचना बहुत अच्छी लगी |बधाई

    आशा

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  13. वर्ज्य नारी स्वर
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    आया तो था नई रचना की उम्मीद में …

    ♥ प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !
    ♥ प्रणय दिवस मंगलमय हो ! :)


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. dorothy ne sach kaha.......antarsambhandho ko ujagir karti ek behtareen rachna..:)

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  15. रचना बहुत अच्छी लगी |बधाई

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  16. कल 10/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  17. अच्छे बिम्ब ले कर गहन बात कह दी है ..

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