Friday, May 20, 2011

वजूद


क्या मैं
पेड़ से झड़ती हुई
सूखी पत्तियां हूँ
जो बिखरी पड़ी है
तुम्हारे क़दमों के
आस-पास

हवाएं अक्सर
उड़ा ले जाती है
मुझे तुमसे
दूर बहुत दूर

तुम्हारे कदम भी
पीछा करते हैं मेरी
ताकि तुम मुझे
रौंदो -मसलो
ख़त्म कर दो
मेरा वजूद

फिर भी
मैं वही रहूंगी
जो मैं हूँ .

24 comments:

  1. फिर भी
    मैं वही रहूंगी
    जो मैं हूँ .

    बहुत अच्छी लगी रचना ...

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  2. वाह......शानदार .......लाजवाब |

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  3. आइना वही रहता है, चेहरे बदल जाते हैं ...

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  4. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 24 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

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  5. फिर भी मैं वही रहूंगी जो हूँ ...
    आत्मविश्वास बना रहे !
    बनूंगी प्रेरक भी ...
    चुनौती भी ...
    एक कविता की पंक्तियाँ है !

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  6. ्बेहद शानदार्।

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  7. बेहद खूबसूरत रचना

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  8. आत्मविश्वास से परिपूर्ण कविता ...आपका आभार

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  9. क्या मैं
    पेड़ से झड़ती हुई
    सूखी पत्तियां हूँ
    जो बिखरी पड़ी है
    तुम्हारे क़दमों के
    आस-पास

    एक सुंदर अभिव्यक्ति
    - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  10. खूबसूरत ! आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ और आकर अच्छा लगा ... आते रहूँगा !

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  11. भतीजी के विवाह में व्यस्त होने के कारण मैं आपकी कविता का आनंद समय से नहीं पा सका अच्छी कविता के लिये बधाई |

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  12. एक नए बिम्ब के साथ सूखे पत्ते को प्रतीक बना कर जो बात आप कहना चाह रहीं थीं, वह न सिर्फ़ स्पष्ट है बलिक मन मो मथती है।

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  13. Kya khub likha hai...achchha laga...likhati rahe...

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  14. फिर भी मैं वही रहूंगी जो कि मैं हूँ .....अस्तित्व वाद के बीच से मुखरित मौन .

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  15. आखिर इतना संदेह ,अविश्वास ,आरोपण क्यों ?

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  16. ये बिल्लौरी एक आँख वाली फोटो तो कम से कम हटा लीजिये प्लीज ,चुभती हैं !
    -एक प्रशंसक की फ़रियाद!

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  17. Pattaa toota daal se le gai pavan udaay ,
    abke bichhde kab mile door padenegn jaay .
    Sorry could not write this coplet in hindi for you as comments on your write up ..

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  18. Un puroshon k baare me kyo nahin socha jo striyon ko palko par bitha k rakhte hain......

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  19. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |
    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||
    --
    बुधवारीय चर्चा मंच

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