Tuesday, June 14, 2011

कठमोझी


न जाने कबसे
चलता आ रहा है
ये षड़यंत्र
नारी बन जाए
जीता-जागता यन्त्र

कभी आँखों की
पुतली को
कब,क्यूँ और कैसे
बना दिया जाता है
आँखों में पड़ा
हर-पल चुभता हुआ
धूलि-कण .....

असह्य दर्द से
निज़ात पाने के लिए
चलता रहता है
अनवरत उपक्रम ....

और तो और
ना-नुकुर की अंशमात्र
संभावना को देखते हुए
उसके अस्तित्व को ही
डोरी से फँसाकर
बाध्य किया जाता है
अँगुलियों पर
नाचने के लिए...
.
जिससे
हर कनिमोझी
बनती रहे - कठमोझी
एक जीती-जागती
काठ की पुतली...

हाँ ....नित-नयी 
तमाशा दिखाने वाली
कुछ-कुछ
सनसनीखेज़ सी....

या यूँ कह ले
मसालेदार,मनोरंजक .

44 comments:

  1. बहुत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है .......सुन्दर

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  2. utsav ke liye aapki rachnayen chahiye , rasprabha@gmail.com per mujhse miliye

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  3. सही कहा, पर दुख तो इस बात का है कि ज्‍यादातर महिलाएं इस बात को समझ ही नहीं पातीं।

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    ब्‍लॉग समीक्षा की 20वीं कड़ी...
    आई साइबोर्ग, नैतिकता की धज्जियाँ...

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  4. कठ -मोझी से कनि-मोझी तक नारी को कठ पुतली बनाने वाली साजिश का पर्दा फाश कर दिया आपकी पोस्ट ने .

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  5. नारी काठ की पुतली ही बाना दी जाती है ... सटीक अभिव्यक्ति

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  6. बहुत ही सुंदर कविता पढ़ने को मिली माननीया आपको बधाई और शुभकामनाएं |

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  7. सही नाम क्या है मोहतरमा का -मुझे तो कलमुंही लगता है :(

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  8. अरविन्द जी से सहमत
    सुन्दर रचना

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  9. Maulik upma ...vahi alaap....sundar...shubhkamna..

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  10. सभी नारियों को सिर्फ एक नजरिये से विश्लेषित करना उचित नहीं है..
    कनिमोझी कहीं भी काठ की पुतली नहीं..आज की स्वतंत्र नारी है...हाँ बहुधा कविता में उकेरे भावों की तरह नारी को दायरे में सिमित करने एवं उसके अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करने का प्रयास होता है ..
    सुन्दर रचना

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  11. Yeh Adhunik Naari hai......


    jai baba banaras.......

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  12. मर्मस्पर्शी प्रस्तुति..

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  13. एक मर्तबा फिर पढ़ा इस कविता को .आज आधी दुनिया को तमाम प्रतीकों के माध्यम से कठ्मोजी बनाने की साज़िश कई मंचों से चल रही है .तमाम सौन्दर्य प्रतियोगिताओं का लक्षित भी यही है ,राजनीति तो यह काम शुरू से ही करती रही है .चंद अपवाद ज़रूर हैं कुनबों से हटके .

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  14. अच्छी पोस्ट |बधाई
    आशा

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  15. bahut achchhi post....badhai

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  16. कविता की बात में सच्चाई है।
    अच्छी रचना के लिए आभार।

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  17. विचारोत्तेजक है.
    सम्प्रेषण अच्छा है.

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  18. अच्छी व्यंग्योक्ति है वक्रोक्ति भी कठ -मोजी अब इस दौर की राजनीति का एक बिम्ब बन चला है .आपसे हमने इसे उधार ले लिया है .

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  19. सचमुच, कठपुतली ही बना देता है यह समाज।
    आज दूसरी बार पढी आपकी रचना, और फिर कमेंट किए बिना चला जाना अच्‍छा नहीं लगा।
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    विलुप्‍त हो जाएगा इंसान?
    कहाँ ले जाएगी, ये लड़कों की चाहत?

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  20. आपने मेरे ब्लॉग पर आकर मुझे अनुग्रहित किया है.
    बहुत देर से आ पाया हूँ आपके ब्लॉग पर.
    आपकी मर्मस्पर्शी प्रस्तुति के लिए आभार.

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  21. यह पुरुष प्रघान समाज का कटु सत्य है...

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  22. न जाने कब से चला आ रहा है यह षड्यंत्र ,
    नारी बनजाये जीता जागता एक यंत्र ,
    बच्चे पैदा करनें की एक मशीन ,
    और तिस पर तुर्रा यह -
    दम्भी पुरुष कहे -

    क्या तुम चाहती हो पड़ारहूँ मैं तमाम रात तुम्हारी -
    जांघ की दराज में -
    और इस और ऐसी ही कई और कविताओं ,अ -कविताओं पर पा जाए -
    पद्म श्री .
    इस मर्तबा आया वर्ज्य नारी का आर्त -नाद ।

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  23. बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  24. अच्छी सम्प्रेषण शैली की रचना , बधाई

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  25. kya gazab ki bhawabhivyakti hai.......

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  26. सुन्दर रचना के लिए बधाई !
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

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  27. जी !हाँ ,मेरा नाम तो वीरेंद्र शर्मा ही है .घर में सब कहते थे वीरू .मुस्लिम दोस्तों के घर में सब कहते वीरुभाई बस मैं वीरू भाई हो गया .लेकिन आपका नाम वर्ज्य नारी नहीं हो सकता .और फिर आधी दुनिया वर्ज्य हो जायेगी तो शेषांक हो जाएगा शून्य .संपूरक कहाँ से लाइयेगा फिर ?अर्द्ध -नारीश्वर का क्या होगा .ये अलेहदगी तो एनाटोमी की है चंद हारमोनों की है गुणसूत्रों (क्रोमोज़ोम्स )की है .नारी वर्ज्य हो या स्वीकार्य विज्ञान की नजर में एक एक्स -एक्स शख्शियत है और पुरुष एक्स -वाई .एक्स और वाई क्रोमोसोम्ज़ हैं .गुण -सूत्र हैं .२३ जोड़े होते हैं क्रोमोसोम्स के हर जोड़े का एक माँ से दूसरा पिता से संतानों में जाता है .२३ वां जोड़ा सेक्स क्रोमोसोम्स का होता है .यही विधाई भूमिका निभाता है गर्भस्थ के भ्रूण निर्धारण में यदि यह जोड़ा एक्स -एक्स हुआ तो लडकी एक्स -वाई तो लड़का ।
    लडका और लड़की ?फैसला पुरुष की शुक्राणुओं के हाथों में होता है ,पुरुष के पास एक्स भी है वाई है .यौन -मिलन के दौरान इधर से(पुरुष की तरफ से ) एक्स गया तो लड़की और इधर (पुरुषकी तरफ से )वाई गया तो लडकी ।
    अब एक्स -एक्स दुनिया यानी आधी दुनिया वर्ज्य होगी तो यह कायनात चलेगी कैसे ?
    ना नुकुर की संभावना को मेटने ,
    भले ही इंतजामात कितने ही कर लिए गएँ हों ,
    किया सब कुछ उसकी हाँ के लिए ही जाता है ।
    कुल मिलाके किस्सा कुछ कुछ यूं लगता है -
    मेरी रज़ा वही है जिसमे हो तू -
    रजामंद (राजी ).
    इति -
    वर्ज्य नारी को वीरू भाई के प्रणाम ।
    केंटन के सलाम -
    यू एस ए का आदाब !

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  28. मार्मिक ....समसामयिक और प्रभावी व्यंगात्मक पंक्तियाँ....

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  29. वेग और प्रति वेग :
    व्यक्ति नाम और रूप से ही पहचाना जाता है .अब अगर व्यक्ति रूप को विरूपित करके खुद को रहस्य मय बना ले और नाम को छिपाले .वर्ज्य घोषित करदे अपनी संज्ञा सिर्फ वर्ज्य नारी कहकर अपने एक्स -एक्स होने की खबर दे तो रहस्य और भी गहरा जाता है ।
    यहाँ हम बतलादें आपको हमारा सिद्धांत है कोई पश्तो में बात करता है तो पश्तो में ही उसका ज़वाब दो .अनुवाद मत करो ।
    अनुवाद से भाव दब जाता है ।
    विकर्षण में भी आकर्षण होता है क्योंकि विकर्षण कहते ही नकारात्मक आकर्षण को हैं ।
    हेड देयर बीन नो रिपल्शन इन दी यूनिवर्स ,यूनिवर्स वुड हेव कोलेप्स्द .जब इल्क्त्रों और प्रोटोन भी एक दूसरे के एक न्यूनतम सीमा का अतिक्रमण कर और करीब आ जातें हैं तो वे परस्पर एक दूसरे को आकर्षण भूल विकर्षित करने लगतें हैं .विकर्षण से ही आकर्षण है .और विकर्षण पहले आता है आकर्षण बाद में ।

    सवाल और अभिप्राय यहाँ पर इतना भर है यदि कोई नारी वर्ज्य है तो वह वर्ज्य पुरुष के स्तर पर है या स्वयम अपने स्तर पर वर्ज्य है ।
    अगर वह वर्ज्य अपने ही स्तर पर है तो सामान्य -करण का विचार ही नहीं आना चाहिए .और अगर आप ऐसा करतें हैं अपना नाम और रूप दोनों गोपित रखते हुए .तो संवाद कैसे हो .संवाद का स्तर कमसे कम सम -बुद्धि होना चाहिए ।
    क्या वह वर्ज्य नारी अपने आप से डरी हुई है ?
    और अगर पुरुष से डरी हुई है तो अपने आसपास फैला धुआँ हटाना चाहिए उसे और नहीं फैलाना चाहिए ।
    किसी भी व्यक्ति को अपनी मजबूरियों को अपना शौक नहीं बनाना चाहिए ।
    संवाद के दरवाज़े कभी बंद नहीं होते .धुआं हटाने से खुले हुए दरवाज़े नजर आयेंगें ।
    गोपित ,गोपन और गुप्त -ता को तोड़ने वाले कई लोग बैठें हैं हम सभी के आसपास .जो जिस तरीके से चले उसकी चुनौती को उसी परिप्रेक्ष्य में लो ।
    सवाल यह है यह वर्ज्य नारी दार्शनिक बनना चाहती है या गोपनीय .पहली स्थिति में संवाद की पूरी गुंजाइश है .इति।
    वीरुभाई ,४३३०९ ,केंटन (मिशगन ),४८ १८८
    दूरभाष :००१ -७३४ -४४६ -५४५१
    ई -मेल :वी ई ई आर यू बी एच ए आई (वीरुभाई १९४७ @जीमेल .कोम )

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  30. मर्मस्पर्शी प्रस्तुति|

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  31. प्रतीक्षा में युग बीत गए ,
    सन्देश न कोई मिल पाया ,
    सच बतलाऊँ तुम्हें प्राण ,
    इस जीने से मरना भाया ।
    धुंध छटने का इंतज़ार करेंगें क़यामत तक ।
    शुक्र गुज़ार हूँ .आपने अनुक्रिया की ।
    प्रत्येक क्रिया की उसके विपरीत और बराबर प्रति -क्रिया होती है .फॉर एवरी एक्शन फ़ोर्स दे -य़र इज एन इक्वल एंड ओपोसिटरिएक्शन फ़ोर्स .डेट मीन्स फोर्सिज़ अकर इन पेयर्स .यही है न्यूटन का गति का तीसरा नियम -मोतर्मा .

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  32. FORCES OCCUR IN PAIRS .THE OBSESSION IS SO GREAT THAT EVEN PARTICLE ANTI -PARTICLE PAIRS OCCUR .THOUGH when ever they meet they mutually annihilate each other .
    For every particle their is an anti -particle.for every elctron there is an anti -electron ,i .e positron .For every proton ,an anti -proton ,a neutron an anti -neutron and so on so forth .You can not be an exception ..

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  33. ये सारी कायनात परस्पर आश्रित है एक दूजे के लिए हैं .निरपेक्ष और वर्ज्य कहीं कुछ भी नहीं है .परम और एब्सोल्यूट का मतलब है -विद आउट रिलेशन टू एनी -थिंग एक्सटर्नल ।
    अगर कहीं कोई चीज़ वर्ज्य है तो उसी अनुपात और परिमाण में कहीं अन्यत्र कोई चीज़ स्वीकार्य भी है .प्रकृति सममिति (सिमिट्री )प्रेमी है .नेचर लव्ज़ सिमिट्री .संतुलन के लिए न्यूनतम ऊर्जा की और जा रही है यह कायनात .और अब तो प्रत्यारोपित अंग को भी स्वीकृति दिलवाने के लिए रेपा -माइसिन और साइकलो -स्पोरिन मौजूद है .कैसी वर्जना ?कौन वर्ज्य ?सभी तो परस्पर एक अद्रश्य डोर से बंधे हैं ।
    न्यूटन ने कहा था -व्हेन यू रेज़ ए फिंगर दी ग्रेविटेशनल बेलेंस ऑफ़ दी यूनिवर्स इज चेंज्ड .

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  34. या देवी सर्वभूतेषु क्षमा रूपेण संस्थिता.........
    ब्लाग पृष्ठभूमि बहुत डार्क है ...इसे ठीक करें न प्लीज!

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  35. लड़कियों को मानसिक तौर पर बहुत मज़बूत होना पड़ेगा...ताकि कठमोझी न बन सकें, न बनायी जा सकें

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  36. Now its soothing and reader friendly....someone(not me) is disparately seeking your attention ...but in vain...I think he deserves your attention!

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  37. क्या सचमुच कानीमोझी कठमोझी है????

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  38. Bekar ki baat hai.......

    Aaj naaree hi puruso par raaj kar rahi hai.....

    Fir vo chahe Pratibha Patil ho, Sonia ho, Jaylalita ho, Mayavati ho, Mamta ho.....aadi aadi..

    Satta unke paas samarthya unke paas
    fir vyavstha parivartan k liye purushon par dos kyo......

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