Monday, October 3, 2011

चुप्पी


चुप हो जाती मैं
तो क्या होता
बुद्धत्व को उपलब्ध हो जाती
कतई नहीं

संबंधों के परिप्रेक्ष में
सर्व-श्रेष्ठता का दावा करती
कतई नहीं

यंत्रवत हो रिमोट दे देती
दूसरों के हाथ में
कतई नहीं
  
जिन्दगी का एक पहलू दे देता
दूसरा पहलू भी बख्शीश में
कतई नहीं

कोई सुरक्षा कवच मुझे घेर
हो जाता है अभेद्द
कतई नहीं

संवेदनशीलता,ग्राह्यता,सोच-विचार
दफ़न हो जाते मुझ में ही
कतई नहीं

मुझे अपनी चुप्पी तोड़
कईयों को चुप कराना है

जो चुपके से
मजबूर करते रहतें हैं
कईयों को चुप रहने के लिए

और चुपचाप चुप्पी के ही
अँधेरी गहरी खाई में गिराकर
विवश करते हैं  
चुप हो जाने के लिए
सदा के लिए .
     
 

21 comments:

  1. बहुत ही अच्छी लगी कविता।

    सादर

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  2. 'मुझे अपनी चुप्पी तोड़
    कईयों को चुप कराना है'
    ...........बहुत बड़ा संकल्प निहित है आपकी रचना में
    नारी जागरण की उत्कृष्ट रचना

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  3. बहुत खूबसूरत अहसास समेटे ये पोस्ट लाजवाब है | एक विद्रोह एक क्रांति की झलक है इसमें|

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  4. बहुत ही सुंदर!

    धन्यवाद.

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  5. चुभती है चुप्पी चाहे हो जिसकी
    क्यों हो कोई चुप जब जुबान है?
    नहीं चुप होगी यह कोई चाहे कितना
    भी जोर लगा ले ..जान लड़ा दे ....
    कैसी लगी यह प्रति कविता?
    लोग फुसफुसाने लगे हैं आप वो हैं ...
    क्या फरक पड़ता है ?
    यहाँ तो हम रचना के लिए ही आते हैं !:

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  6. बहुत सशक्त प्रस्तुति...

    यहाँ भी कभी आयें :
    http://batenkuchhdilkee.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

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  7. अच्छे तेवर की रचना .सशक्त इरादों की हौसलों की रचना .बधाई .सम्प्रेश्नीय्ता के लिए .

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  8. सशक्त रचना।..बहुत बधाई।

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  9. All of the words are very pinch full to all of the evil thoughts against "NAARI".

    Happy Durga Puja..

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  10. आज नारी को ऐसे ही आत्मबल की जरूरत है ... चुप्पी तोड़ने की जरूरत है ...

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  11. यंत्रवत रिमोट दे देती/ दूसरे के हाथ में.... आज की नारी वही तो करती है अपना सब कुछ न्यौछावर करके॥

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  12. बहुत गहरी बात.... सशक्त भाव लिए रचना

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  13. बहुत बढ़िया लिखा है आपने ! बेहतरीन प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  14. Very-very nice creation.. Regards !..

    I came again to say thank you... I am very glad to know your opinion about my post.. I will work on your suggestion.. Thanx...

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  15. बिलकुल झूठी बात है.............स्त्री चुप रह ही नहीं सकती.........

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  16. Stri mane kak kali ya eak mahakta hua phool.
    Kaha achcha lagega inka khamosh rahna?
    Yeh to bas khlkhilate huye ya muskuraate huye hi apni praakritik awastha me hote hai.
    In ki chuppi ya udaaai jaroor patjhad ka sansesh lati hai.

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  17. सही बात सुन्दरता के साथ। चुप्पी और शोर के चौड़े स्पेक्ट्रम के बीच कहीं पर शिष्ट और मित्रवत सम्वाद की गुंजाइश ढूंढनी ही चाहिये।

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  18. लाजवाब कविता...
    शब्द-शब्द में आत्मविश्वास झलक रहा है।

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  19. katu satya ka darshan karati prabhavshali rachana

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