Monday, October 17, 2011

परजीवी


वो कहता है
मुझे प्यार हुआ है
मन ही मन
वो कहती है
किससे छल
वो कहता है
सच कहता हूँ
मन ही मन
वो कहती है
हरिश्चंद्र की औलाद
वो कहता है
तुम मेरी हो
मन ही मन
वो कहती है
पहले खुद के हो लो
वो कहता है
तुम सिर्फ मेरी हो
मन ही मन
वो कहती है
तेरे बाप का माल हूँ
वो कहता है
तुम मेरी ख़ुशी हो
मन ही मन
वो कहती है
ख़ुशी का अर्थ जानते हो
वो कहता है
तुम मेरी जिन्दगी हो
मन ही मन
वो कहती है
रजिस्ट्री करा लिए हो
वो कहता है
तुम्हारे बिना मैं
जिन्दा नहीं रह सकता
वह बोल उठती है
परजीवी कहीं का .

29 comments:

  1. परजीवी कहीं का ...
    वाह कमाल की रचना है ... दोनों के मन के भाव कैसे हैं ... क्या सोचते हैं ... पर असलियत ही लिखी है आपने ...

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  2. वाह!
    बहुत ही गजब की कविता रची है आपने।

    सादर

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  3. आँखें वो खोलने वाली पोस्ट

    इन पंक्तियों को पढकर मै भी मन ही मन परजीवी के बारे में सोच रहा हूँ पर क्या किसी के बगैर न रह पाना परजीवी होना है? हवा पानी सांस आदि कितनी ही ऐसी चीजे हैं जिनके बगैर हम नहीं रह सकते । शायद प्यार भी तो इसी को ही तो कहते हैं ?

    आपकी कविता किसी शातिर दिमाग वाले का चालाकी भरा सटीक विष्लेषण/आकलन लगती है।

    आभार

    शायद आज की परिस्थिति में यही सच हो?

    कृपया मुझे भी हवा पानी सांस आदि बगैर परजीवी समझ कर आर्शिवाद दे ! आभारी रहूँगा !!

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  4. वादे होते रहते हैं पर पहले खुद के तो हो लो :)

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  5. kamaal ki rachna ... pragat aur maun samvaad bahut achha laga

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  6. वाह मजेदार भी और सोचने को विवश करती हुयी ....हाय राम ,ऐसी होती हैं ये कन्याएं? न जाने क्यूं आपकी कवितायें मुझमें तत्क्षण प्रति कविताओं का स्फुरण करा देती हैं ......कुछ कुछ होने लगा है क्या ? :)
    लीजिये आपकी नजर:
    "मैं केवल तुम्हे चाहता हूँ "
    "झूंठ...."
    साली को कैसे विश्वास दिलाऊँ बड़ी घाघ है सब जानती समझती है (मन में )
    "तुम्हारी कसम ..." (लगे रहो मुन्ना भाई इसके पास कोई विकल्प भी तो नहीं ...मन में )
    "झूंठी कसमें मत खाईये ..."
    "सच कहता हूँ तुम मेरे जीवन में पहली हो ....." बड़ी घाघ है सचमुच लगता है नहीं निभेगा और यही कौन सी सती सावित्री होगी अब तक ....(मन में )
    "बात बनाना तो कोई आपसे सीखे "
    अब तुम्हे कुछ सुनना ही नहीं है तो मैं चुप हो जाता हूँ (न पटे तो भाड़ में जाय कौन इतनी जोर मशक्कत करे ..यह नहीं कोई और सही ..वैसे भी घाघों से दूर रहना बेहतर ..मन में )
    "नाराज हो गए ......" (पुरुष के प्यार को तराजू पर नहीं तौला जाता इसे यह भी नहीं पता ..मिलते ही हलोर लेना चाहिए ...और इतना इतना चिपका लेना चाहिए कि वह चाह कर भी न छिटक पाए ..कौन समझाए यह सब इसे .....मन में )_
    अंतहीन है यह विवाद ! बस समय को मत खोयिये ! बार बार समझा रहा हूँ आपको !

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  7. जब वो मेरे मन की सब कुछ जान ही लेते हैं तो कहे से का फ़ायदा ?

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  8. सचमुच आँखें खोल देने वाली रचना और टिप्पणियां!

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  9. तो उनसे बेहतर तो वही हुए ना जो सोचे ,वही कह भी दे!

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  10. @@अरविन्द jee,मैंने आपकी राधा के बारे में या आपके शाश्वत प्रेम के बारे में तो कुछ नहीं कहा . आप खामखाह उबल गए. जो सामान्यत होता है आजकल मैंने वही लिखा है. आप अपवाद हैं तो बधाई हो.

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  11. @मेरे ब्लॉग पर जवाब पढ़ लें देवि !

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  12. बहुत कमाल की सोच और उसकी प्रस्तुति..आजकल के हालात में यह सोच शायद सही हो...

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  13. :-) :-)

    बढ़िया है आज के चलन को दर्शाया है आपने......पर कहीं न कहीं सब एक से नहीं होते......आपकी पोस्ट कुछ लग है कुछ नयापन लिए ........अच्छी लगी|

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  14. संवाद शैली में अच्छी रचना !

    साथ ही अच्छा संवाद आपका और अरविंद जी का !
    :)


    आपको सपरिवार
    दीपावली की बधाइयां !
    शुभकामनाएं !
    मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  15. ख़ूबसूरत कविता, सुंदर भाव।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  16. bahut sunder kavita deepawali ki shubhkamnayen
    badhai
    rachana

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  17. कमाल की रचना है सुन्दर प्रस्तुति
    आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  18. कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 20 दिनों से ब्लॉग से दूर था
    देरी से पहुच पाया हूँ

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  19. aabhar .....
    diwali ki hardik shubhkamnayen.

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  20. वाह! क्या बात है आपकी अनुपम अभिव्यक्ति
    'परजीवी कहीं का' में.

    सीधी सीधी खरी खरी अभिव्यक्ति के लिए आभार.

    धनतेरस व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  21. मनोभावों का यथार्थ चित्रण..
    आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  22. कमाल कि प्रस्तुति. बधाई.
    आपको व आपके परिवार को दीपावली कि ढेरों शुभकामनायें

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  23. पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें !
    ***************************************************

    "आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"

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  24. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  25. Bahut hi satik rachna..
    Yatharth ko mukhar karti rachna..

    Shubh Dipawali..

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  26. आपको, आपके मित्रों और परिजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  27. मुझे तो अच्छी/सच्ची लगी कविता की बातें।
    ..बहुत बधाई।

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  28. परजीवी कहीं का...! का कोई जवाब नहीं है। लाज़वाब है।

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