Sunday, November 13, 2011

मैं लाश ..


अपनी सड़ी लाश से
चिपकी मैं ही
बहती जा रही हूँ
राहत दल
मंडरा रहे हैं
मेरे इर्द - गिर्द
कई हाथ
बढ़ते हैं मेरी तरफ
उन हाथों में
होता है बहुत कुछ
मानो आपरेशन- कक्ष में
मैं और मेरे
अंग-प्रत्यंग का
मेरी साँसों का
सफल प्रत्यारोपण
उन हाथों के अनुरूप
करना है मुझे
अपना परिवर्तन
अन्यथा मुझे
डूबा दिया जाएगा
किसी सैलाब में
लाश बनकर
तैरने के लिए.