Sunday, January 8, 2012

बदरंग


क्या मैं एक खुबसूरत डायरी हूँ
जिसके कोरे पन्ने पर
कोई भी लिख देता है
अपना कच्चा-पक्का चिट्ठा
और मैं बन जाती हूँ
इस काल की मौन गवाह...
क्या मैं एक फोटो फ्रेम हूँ
जिसमें कस दिया जाता है
जबरन कोई भी तस्वीर
पाषाणयुगीन , मध्ययुगीन
या आज के युग का घिनौना सा
जिसमें वे तमाम बातें होती हैं
जिन्हें नहीं होना चाहिए था...
क्या मैं शतरंज की बिछी बिसात हूँ
ताजपोशी के लिए जिसपर
हमेशा  होती रहती हैं
बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ
मर-कट जाते हैं हजारों-लाखों
और मैं शर्म से हुई रहती हूँ
सुर्ख लाल...
क्या मैं अपने आसमान में उड़ती
अकेली तितली हूँ जो
अपने ही मुरझाये फूलों का
पराग चूस-चूस कर
मान लेती हूँ कि
सारे शोख व चटक रंग
मुझमें ही है और
मैं खुद को ही दिखने लगती हूँ-
बदरंग .


23 comments:

  1. आत्मविश्लेषण को अभिव्यक्त करती बेहतरीन कविता।

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  2. आत्मविश्लेषण को अभिव्यक्त करती बेहतरीन कविता।

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  3. इतनी निरीह तो नहीं है नारी ,अगर वह साहस और समझ-बूझ रखे तो !

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  4. आप बदरंग नही सबरंग हैं जी.
    बहुत दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा.
    नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएँ आपको.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  5. कभी कभी हम खुद पर ही आरोपित कर लेते हैं ऐसे रंग जो बदरंग से लगते हैं ..

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  6. बात कुछ हजम नहीं हुयी
    इस दुनिया के सारे रंग तो नारी ने ही समेटे हैं
    पुरूष नामक संस्था तो बस उन रंगो को निहारने के लिये ही बनी हैं।
    इस बार नये वर्ष में आने पर आने बडीं देर की फिर भी शुभकामनाऐं तो बनती हें ना....सो नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं

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  7. सुभानाल्लाह.........बहुत ख़ूबसूरत.........हैट्स ऑफ इसके लिए|

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  8. कल 10/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. सार्थक प्रयास है.....
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत व इंतजार है।

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  10. प्रकृति के सभी रंग तो उसीमे है !

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  11. यथार्थ का सुन्दर वर्णन
    आशा

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  12. बहुत ही गहरे एहसास लिए सुंदर प्रस्तुति....

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  13. बहुत सुन्दर...
    अदभुद अंतर्द्वंद..

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  14. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई

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  15. सुंदर बिम्ब प्रयोग।

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  16. ताजपोशी ही नहीं औरत के लिए भी कई लडाइयां लडी गई है जिसका गवाह इतिहास है।

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  17. चिन्तनोन्मुख करती सशक्त रचना...

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  18. Nari man ki peeda ko vyakt karti ... Samaj ka yathart dikhati ... Behatreen aur shashakt abhivyakti ....

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  19. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर

    charchamanch.blogspot.com

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  20. नारी के तो अनेक रूप हैं ...विचारणीय

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  21. नारी ह्रदय को भावपूर्ण शब्दों में पिरोने के लिए हार्दिक बधाई..

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