Thursday, February 2, 2012

अर्थहीन


बड़ी सफाई से
अपनी वास्तविकता से
नजरें चुरा कर
दिन-रात युक्तियाँ लगाकर
भीषण दुराग्रहों के बीच भी
नहीं जान पाती हैं - स्त्रियाँ
मौन या मुखर
अस्वीकृतियों का राज़
जो उसके प्रति वक़्त-बेवक्त
दिखाया जाता है - जानबूझकर

जबकि पारिवारिक दंगे-फ़साद की
सबसे कोमल और आसान लक्ष्य
वही बनायी जाती है

हरवक्त सुनना पड़ता है - स्त्रियों को
हवा में तैरते फुंकार को
सोखना पड़ता है विष - सांसों से
अमृत बाहर करना पड़ता है

वह उलझती रहती है
नित नई बनती
षड्यंत्रों के मकड़जाल में
और महसूसती है - विशेष अपनापन

हर बार उत्साह से भरकर
देती है हर उस परीक्षा को
जिसका फल उसे पता होता है
कि उसकी दुर्बलता को
आँका जाएगा - शून्य से

और तो और
अपने अटपटे अधूरेपन में भी
बनाती रहती है बेहतर जगह -
पूर्णता के लिए

फिर तय की गयी भंगिमाओं से
भिन्न-भिन्न भूमिकाओं को
जीवंत करके
गढ़ती रहती है - परिभाषाएँ
सुखी परिवार की

जो बड़ी सफाई से उसी के लिए
बन जाता है - अर्थहीन .