Friday, February 8, 2013

जीवित शाहकार


ओ! पुरुष
हजारों-लाखों चीजों को
तुम जन्म देते रहो
लिखते रहो कविता
बनाते रहो मूर्तियाँ
और कभी ज्यादा खुश होकर
ताजमहल से भी ज्यादा
कोई महल बना दो
अपनी अपूर्णता को
पूर्ण करने के लिए
करते रहो निरंतर चेष्टा
और अनुभव करो
खुद में ही कि
तुम भी हो एक स्रष्टा
पर तुम्हारा सृजन झूठा
और तुम एक झूठे स्रष्टा
झूठी प्रसव-पीड़ा तुम्हारी
झूठी तृप्ति का दंभ
सच-सच बताओ कि
एक साधारण-सी स्त्री ही
क्या काफी नहीं है
तुम्हें मात देने के लिए
जो सौंपती है तुम्हें
जीवित शाहकार .

17 comments:

  1. एक स्त्री रचती है तुम्हे
    अपने रुधिर के ताप से
    तनिक सोचो .....
    -------------------------
    हम सदैव अपूर्ण और मात खाते रहेंगे......
    बहुत बढ़िया लिखा .....

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  2. रचना बढ़िया है .एक मेहरबानी कर दें कृपया शाहकार शब्द का अर्थ समझा दें .सृष्टि /सृष्टा

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (9-2-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  4. बहुत खूब सर .बढ़िया प्रस्तुति .

    पुत्र दान करके तुम्हारी वंशवेळ मैं ही बढ़ा रही हूँ .तुम्हें सौंप के जीवित शाहकार .तुम सृजन नहीं कर सकते अपूर्ण हो .नारी और पुरुष का यह द्वंद्व बहुत पुराना नहीं है .1960 की प्रगति वादी धारा

    में यह मुखरित हुआ है जहां कवियित्री पुरुष के सहकार ,सहयोग साहचर्य में यकीन न रख कर कटु बनी हुई है पुरुष मात्र के प्रति ,वह उसे संपूरक नहीं मानती .कोंचती रहती है निरंतर पुरूष को जीवन में

    न सही

    कविता में कौन्चों .

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  5. पुत्र दान करके तुम्हारी वंशवेळ को मैं ही बढ़ा रही हूँ .तुम्हें सौंप के जीवित शाहकार .तुम सृजन नहीं कर सकते अपूर्ण हो .नारी और पुरुष का यह द्वंद्व बहुत पुराना नहीं है .1960 की प्रगति वादी

    धारा

    में यह मुखरित हुआ है जहां कवियित्री पुरुष के सहकार ,सहयोग साहचर्य में यकीन न रख कर कटु बनी हुई है पुरुष मात्र के प्रति ,वह उसे संपूरक नहीं मानती .कोंचती रहती है निरंतर पुरूष को

    जीवन में

    न सही

    कविता में कौन्चों .

    एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :

    जीवित शाहकार /वर्ज्य नारी स्वर

    http://varjyanaariswar.blogspot.in/2013/02/blog-post.html?showComment=1360324811687#c457124259361874828

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  6. बेमिसाल अभिव्यक्ति..कितना सच है कि पुरुष का झूठा दंभ इक स्त्री के त्याग के आगे पानी भरता है.

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  7. तुम जन्म देता रहो
    उपर्युक्त पंक्ति में देता की जगह देते रहो होना चाहिए ,अच्छे भाव ,अंतिम पंक्ति में लिए उपयुक्त शब्द कौन सा है :- सहकार और "शाहकार" में अंतर को स्पष्ट करने का कष्ट करे ,नारी के महत्व को प्रतिपादित करती सराहनीय रचना ,शुभकामनाये

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    Replies
    1. शाहकार का अर्थ बेहतरीन कलाकृति होता है.गलती की तरफ ध्यान दिलाने के लिए आपका आभार.मैं ठीक किये देती हूँ.

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  8. कोर सत्य लिखा है ... पुरुष कुछ भी नहीं है स्त्री के आगे ... उसकी एक क्षमता ही काफी है पुरुष को मात देने के लिए ...

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  9. यह सही है नारी को कुछ सृजन करने की जरुरत नहीं वह अपने आप में पूर्ण है
    एक बच्चे को जन्म देकर और भी परिपूर्ण हो जाती है ...बायोलाजिकल नारी में जो सौन्दर्य,सुघड़ता का प्रपोरशन है वह चौबीस-चौबीस सेल का है
    पुरुष में तेईस का है इसलिए एक इन्नर टेन्शन होने से उसने सारे सृजन किये है फिर भी वह इस सृजन से फेमिनाइन तो हुआ है युद्ध करने से तो अच्छा है
    सृजन करना ....मुझे तो लगता है दोनों एकदूसरे के बगैर अपूर्ण है जीवन में दोनों का योगदान है !

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  10. बेहतरीन,
    काश कि पुरुष की सोच भी यूँ ही हो जाए....
    अनु
    http://allexpression.blogspot.in/2013/02/blog-post_6759.html

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  11. बहुत दृढ़ विचार ॥
    सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें ...!!

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  12. क्या खूब कहा आपने वहा वहा क्या शब्द दिए है आपकी उम्दा प्रस्तुती
    मेरी नई रचना
    प्रेमविरह
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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  13. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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