Sunday, December 15, 2013

मंजूर है !

सुलगती हूँ मैं
तो क्यूँ भर आती है
आँखें तुम्हारी ?
क्यों बैठे हो तुम
हवा और पानी पर
कुंडली मारे ?
या तो जीने लायक
मुझे हवा दे दो
या डाल दो
मुझपर पानी

मैंने प्यार किया है
सिर्फ तुमसे
इसलिए जलना भी
मंजूर है
बुझ जाना भी
मंजूर है
या फिर
तुम्हारी आँखों में
भरकर यूँ ही
सुलगते रहना
मंजूर है
मंजूर है
मंजूर है .